भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Liberty) संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित मौलिक अधिकार है। इसी अधिकार की सुरक्षा के लिए D.K. Basu v. State of West Bengal में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी और हिरासत के दौरान पुलिस अधिकारियों के लिए कुछ अनिवार्य प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश (Mandatory Procedural Safeguards) निर्धारित किए।
● गिरफ्तारी करने तथा पूछताछ करने वाले सभी पुलिस कर्मियों के पास स्पष्ट पहचान-पत्र एवं नाम-पट्ट (Name Tag) होना अनिवार्य है।
साथ ही, पूछताछ में शामिल प्रत्येक अधिकारी का विवरण आधिकारिक रजिस्टर में अंकित किया जाना आवश्यक है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
गिरफ्तारी के समय पुलिस अधिकारी को तत्काल “गिरफ्तारी मेमो” तैयार करना होगा।
यह मेमो—
● कम से कम एक स्वतंत्र गवाह द्वारा सत्यापित होना चाहिए,
● गवाह परिवार का सदस्य या स्थानीय सम्मानित व्यक्ति हो सकता है,
● मेमो पर गिरफ्तार व्यक्ति के हस्ताक्षर भी आवश्यक होंगे,
● तथा उसमें गिरफ्तारी की तिथि और समय स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
● गिरफ्तार व्यक्ति को यह विधिक अधिकार है कि उसके किसी मित्र, रिश्तेदार या हितैषी को गिरफ्तारी की सूचना दी जाए।
● यदि गिरफ्तारी मेमो का गवाह वही व्यक्ति है, तो अलग से सूचना देना आवश्यक नहीं होगा।
यदि गिरफ्तार व्यक्ति का निकट संबंधी किसी अन्य जिले या नगर में रहता है, तो पुलिस को 8 से 12 घंटे के भीतर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या संबंधित पुलिस स्टेशन के माध्यम से टेलीग्राफिक/संदेश द्वारा सूचना देना अनिवार्य है।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस अधिकारी का दायित्व है कि वह गिरफ्तार व्यक्ति को उसके इस अधिकार के बारे में अवगत कराए कि वह अपने किसी परिचित को सूचना दिलवा सकता है।
हिरासत स्थल की केस डायरी या जनरल डायरी में गिरफ्तारी की प्रविष्टि करना अनिवार्य है।
इस प्रविष्टि में—
● सूचना प्राप्त करने वाले परिजन का नाम,
● हिरासत में रखने वाले पुलिस अधिकारियों का विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।
● यदि गिरफ्तार व्यक्ति ऐसा अनुरोध करता है, तो गिरफ्तारी के समय उसका चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना चाहिए।
● उसके शरीर पर मौजूद छोटी या बड़ी सभी चोटों का विवरण “इंस्पेक्शन मेमो” में दर्ज किया जाएगा, जिस पर—
पुलिस अधिकारी और गिरफ्तार व्यक्ति दोनों के हस्ताक्षर होंगे।
हिरासत के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति का हर 48 घंटे में एक अधिकृत चिकित्सक द्वारा मेडिकल परीक्षण किया जाना अनिवार्य है, जिसे राज्य के स्वास्थ्य निदेशक द्वारा स्वीकृत डॉक्टरों के पैनल से नियुक्त किया गया हो।
गिरफ्तारी से संबंधित सभी दस्तावेज—विशेषकर गिरफ्तारी मेमो—की प्रतिलिपि संबंधित इलाका मजिस्ट्रेट (Illaqa Magistrate) को रिकॉर्ड हेतु भेजी जानी चाहिए।
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति को अपने अधिवक्ता से मिलने की अनुमति दी जा सकती है, यद्यपि यह अनुमति पूरे समय पूछताछ के दौरान निरंतर उपस्थित रहने के रूप में नहीं होगी।
प्रत्येक जिला एवं राज्य मुख्यालय में पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित होना चाहिए, जहाँ गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी 12 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और हिरासत स्थल की सूचना उपलब्ध कराए और उसे नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाए।
उल्लंघन की विधिक परिणति
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जाता, तो संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध—
● विभागीय कार्यवाही (Departmental Action)
● तथा न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की कार्यवाही की जा सकती है, और ऐसी अवमानना की कार्यवाही किसी भी सक्षम उच्च न्यायालय में संस्थित की जा सकती है।
● ये दिशानिर्देश न केवल गिरफ्तारी की प्रक्रिया को विधिसम्मत बनाते हैं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने का संवैधानिक तंत्र भी स्थापित करते हैं।

