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“क्या तलाकशुदा पत्नी को भी मिलेगा भरण-पोषण? धारा 144 BNSS जानिए”

 



धारा 144 – पत्नी, संतान एवं माता-पिता के भरण-पोषण का आदेश

(Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 144 BNSS, 2023 हमारे समाज के सबसे संवेदनशील पहलू — परिवारिक उत्तरदायित्व — को कानूनी रूप देती है।
यह धारा उस स्थिति से सम्बंधित है जब कोई व्यक्ति, पर्याप्त साधन होने के बावजूद, अपनी पत्नी, संतान या माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करता।
कानून ऐसे आश्रितों को न्यायिक संरक्षण प्रदान करता है ताकि वे गरिमामय जीवन जी सकें।


⚖️ उद्देश्य (Objective)

इस धारा का मूल उद्देश्य सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करना है।
यह सुनिश्चित करता है कि परिवार का कोई सदस्य — चाहे पत्नी हो, बच्चा या वृद्ध माता-पिता — आर्थिक रूप से असहाय न रहे।
भरण-पोषण का यह अधिकार न केवल कानूनी दायित्व है, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।


⚖️ मुख्य प्रावधान (Main Provisions)

(1) कौन आवेदन कर सकता है –

प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट भरण-पोषण का आदेश दे सकता है, यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त साधन होते हुए भी अपने

  • (a) पत्नी को,
  • (b) संतान (वैध या अवैध, विवाहित या अविवाहित),
  • (c) विकलांग वयस्क संतान को, या
  • (d) माता-पिता को
    पालन-पोषण से वंचित करता है।

(2) अंतरिम भरण-पोषण (Interim Maintenance):

कार्यवाही लंबित रहने के दौरान मजिस्ट्रेट अंतरिम भरण-पोषण एवं मुकदमे के खर्चों का आदेश दे सकता है।
इस आवेदन का निपटारा नोटिस प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर होना चाहिए।


(3) पत्नी की परिभाषा (Definition of Wife):

“पत्नी” में तलाकशुदा स्त्री भी शामिल है, यदि उसने पुनर्विवाह नहीं किया है


(4) भुगतान की तिथि (Date of Payment):

भरण-पोषण आदेश की तारीख से या, न्यायालय के आदेश पर, आवेदन की तारीख से देय हो सकता है।


(5) आदेश का उल्लंघन (Non-Compliance):

यदि भुगतान नहीं किया जाता, तो

  • मजिस्ट्रेट वसूली हेतु वारंट जारी कर सकता है,
  • और भुगतान न करने पर एक माह तक की कारावास भी दी जा सकती है।
    वसूली का आवेदन एक वर्ष के भीतर किया जाना आवश्यक है।

(6) पत्नी का साथ रहने से इंकार (Refusal to Live with Husband):

यदि पत्नी साथ रहने से मना करती है, तो मजिस्ट्रेट कारणों की जांच करेगा।
यदि पति ने दूसरी शादी कर ली है या किसी अन्य स्त्री को रखता है, तो पत्नी का मना करना न्यायसंगत कारण (Just Ground) माना जाएगा।



(7) भरण-पोषण से वंचना (Disqualification):

पत्नी को भरण-पोषण नहीं मिलेगा यदि वह –

  • व्यभिचार (Adultery) में लिप्त है,
  • बिना उचित कारण पति से अलग रह रही है,
  • या पारस्परिक सहमति से अलग रह रही हो।

(8) आदेश का निरस्तीकरण (Cancellation of Order):

यदि सिद्ध हो जाए कि पत्नी व्यभिचार में लिप्त है या बिना उचित कारण पति से अलग रह रही है,
तो मजिस्ट्रेट भरण-पोषण आदेश को निरस्त कर सकता है।



⚖️ महत्वपूर्ण न्यायनिर्णय (Landmark Judgments)

  1. Mohd. Ahmed Khan v. Shah Bano Begum (1985)
    मुस्लिम महिला को भी भरण-पोषण का अधिकार CrPC की धारा 125 (अब BNSS की धारा 144) के तहत प्राप्त है।

  2. Bai Tahira v. Ali Hussain Fidaalli Chothia (1978)
    तलाकशुदा पत्नी, यदि पुनर्विवाह नहीं करती, तो भरण-पोषण की पात्र है।

  3. Bhupinder Singh v. Daljit Kaur (1978)
    भरण-पोषण का उद्देश्य कमजोर वर्ग की सामाजिक सुरक्षा है।

  4. Chanmuniya v. Virendra Kumar Singh Kushwaha (2010)
    “पत्नी” शब्द का विस्तार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला तक किया जा सकता है,
    यदि वह संबंध वैवाहिक स्वरूप का हो।



⚖️ निष्कर्ष (Conclusion)

धारा 144 BNSS, 2023 सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ है।
यह सुनिश्चित करती है कि परिवारिक संबंध केवल भावनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि कानूनी उत्तरदायित्व से भी बंधे हों।
यह धारा न केवल कानूनी बल्कि मानवीय करुणा का भी प्रतीक है —
जहाँ न्याय, दया और उत्तरदायित्व एक साथ चलते हैं।