पूर्वजीय (Ancestral) संपत्ति के महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु ।
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956, 2005 संशोधन
क्या दादा की संपत्ति पिता को मिली, लेकिन परदादा के समय में संपत्ति बंट चुकी थी। ऐसे में, क्या दादा की संपत्ति पूर्वजीय (Ancestral) मानी जाएगी या स्वअर्जित (Self-acquired)?
(A) पूर्वजीय संपत्ति (Ancestral Property)
अगर कोई संपत्ति पूर्वजों से मिली है और चार पीढ़ियों तक बंटवारा नहीं हुआ है, तो वह पूर्वजीय संपत्ति मानी जाती है।
इस संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार होता है — बेटा और बेटी दोनों के लिए।
(B) स्वअर्जित संपत्ति (Self-acquired Property)
अगर किसी भी समय कानूनी बंटवारा हो गया, तो उस बंटवारे के बाद जो हिस्सा किसी को मिला, वह स्वअर्जित संपत्ति बन जाता है।
उस हिस्से में बच्चों को जन्म से कोई अधिकार नहीं मिलता।
उस व्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता होती है कि वह अपनी संपत्ति को बेच सकता है, दान कर सकता है, या वसीयत के जरिए किसी को भी दे सकता है।
Case 1 — परदादा के समय बंटवारा हो गया था ✅
परदादा की संपत्ति, मान लीजिए 20 एकड़ थी। परदादा के 2 बेटे थे: दादा और दादा के भाई। परदादा की मृत्यु के समय कानूनी रूप से बंटवारा हो गया और दादा को 10 एकड़ जमीन मिल गई।
इस स्थिति में:
● दादा की 10 एकड़ जमीन स्वअर्जित संपत्ति मानी जाएगी।
● कारण: परदादा की मृत्यु के समय कानूनी बंटवारा हो चुका है।
● इस 10 एकड़ जमीन पर दादा के बेटों या पोतों को जन्म से कोई अधिकार नहीं होगा।
● दादा अपनी 10 एकड़ जमीन को अपनी मर्जी से बेच, दान, या वसीयत कर सकते हैं।
Case 2 — परदादा के समय बंटवारा नहीं हुआ था ❌
अगर परदादा की 20 एकड़ जमीन पर कोई बंटवारा नहीं हुआ था। परदादा की मृत्यु के बाद दादा और दादा के भाई संयुक्त रूप से मालिक बने रहे। यह जमीन दादा से पिता, और पिता से बेटे तक बिना बंटवारे के चलती रही।
इस स्थिति में:
● यह जमीन पूर्वजीय संपत्ति मानी जाएगी।
● दादा, पिता, और पुत्र — तीनों coparceners हैं।
● इस जमीन में पुत्र और पुत्री को जन्म से ही समान अधिकार होगा।
● दादा अकेले अपनी मर्जी से पूरी जमीन बेच या दान नहीं कर सकते।