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धमकी और अपमान अपराधों में दंड

Criminal Intimidation 





यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी माध्यम से निम्न प्रकार की धमकी देता है—


● उसके शरीर (Person) को क्षति पहुँचाने की,


● उसकी प्रतिष्ठा (Reputation) को हानि पहुँचाने की,


● उसकी संपत्ति (Property) को नुकसान पहुँचाने की,


● या ऐसे किसी व्यक्ति के शरीर अथवा प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने की, जिसमें वह व्यक्ति विधिक अथवा सामाजिक रूप से रुचि (Interested Person) रखता हो, और ऐसी धमकी देने का उद्देश्य—


● उस व्यक्ति के मन में भय या आतंक उत्पन्न करना, या


● उसे ऐसा कोई कार्य करने के लिए बाध्य करना, जिसे वह कानूनन करने के लिए बाध्य नहीं है, या


● उसे ऐसा कोई वैध कार्य न करने के लिए विवश करना, जिसे वह कानूनन करने का अधिकार रखता है,

तो ऐसा कृत्य आपराधिक भयादोहन की श्रेणी में आता है।


यदि किसी व्यक्ति को इस आशय से धमकी दी जाती है कि किसी ऐसे मृत व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया जाएगा, जिससे वह व्यक्ति भावनात्मक, पारिवारिक या सामाजिक रूप से जुड़ा हुआ है, तो वह भी इस धारा के अंतर्गत आपराधिक भयादोहन माना जाएगा। धारा 351 BNS – (Criminal Intimidation)


(2) साधारण दंड (Punishment):

धारा 351(1) के अंतर्गत दोषसिद्ध होने पर अभियुक्त को—

● दो वर्ष तक का कारावास, या

● अर्थदंड, या

● दोनों से दंडित किया जा सकता है।


(3) गंभीर प्रकृति की धमकी (Aggravated Criminal Intimidation):

यदि धमकी निम्न में से किसी आशय से दी जाए—

● मृत्यु कारित करने की,


● गंभीर चोट (Grievous Hurt) पहुँचाने की,


● आग लगाकर संपत्ति नष्ट करने की,


● ऐसे अपराध की, जो मृत्युदंड, आजीवन कारावास, अथवा सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो,


● अथवा किसी स्त्री की शीलभंग/असतीत्व (Unchastity) का आरोप लगाने की,


तो ऐसे अपराध के लिए—


● सात वर्ष तक का कारावास,

● या अर्थदंड,

● या दोनों का प्रावधान है।


(4) अज्ञात धमकी (Anonymous Criminal Intimidation):

यदि आपराधिक भयादोहन—

  • अज्ञात रूप से, या
  • अपना नाम अथवा निवास छिपाकर किया गया हो,

तो अभियुक्त को उपधारा (1) में वर्णित दंड के अतिरिक्त,

  • दो वर्ष तक के अतिरिक्त कारावास से दंडित किया जा सकता है।

⚖️ धारा 352 – शांति भंग कराने के आशय से जानबूझकर अपमान

(Intentional Insult with Intent to Provoke Breach of Peace)

अपराध के आवश्यक तत्व:

यदि कोई व्यक्ति—

  1. जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का किसी भी प्रकार से अपमान करता है, और
  2. ऐसा अपमान उकसावे (Provocation) का कारण बनता है, तथा
  3. अपमान करने वाले को यह आशय या ज्ञान हो कि इस उकसावे से—
    • लोक शांति भंग हो सकती है, या
    • कोई अन्य दंडनीय अपराध घटित हो सकता है,

तो ऐसा कृत्य धारा 352 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा।


दंड (Punishment):

इस धारा के अंतर्गत दोषसिद्ध होने पर अभियुक्त को—

● दो वर्ष तक का कारावास,

● या अर्थदंड,

● या दोनों से दंडित किया जा सकता है।


संक्षिप्त विधिक भेद (Difference in Application):


धारा 351 का केंद्र बिंदु धमकी एवं भय उत्पन्न करना है।

धारा 352 का केंद्र बिंदु अपमान द्वारा शांति भंग का उकसावा है।