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फाइनेंस कंपनियों के एजेंट बिना चेतावनी दिए वाहन जब्त कर लेते हैं। क्या यह तरीका कानूनी है?

 

वाहन लोन और जबरन गाड़ी उठाने का मामला: क्या कहता है कानून?



🔹 बढ़ती मनमानी और गिरती न्यायिक प्रक्रिया

आज के समय में लाखों लोग फाइनेंस पर दोपहिया या चारपहिया वाहन लेते हैं। लेकिन जैसे ही 2-3 किस्तें चूकती हैं, फाइनेंस कंपनियों के एजेंट बिना चेतावनी दिए वाहन जब्त कर लेते हैं। क्या यह तरीका कानूनी है? पटना हाईकोर्ट का हालिया फैसला इस विषय में क्रांतिकारी दिशा निर्देश देता है।



⚖️ पटना हाईकोर्ट का फैसला – कानून से बड़ा कोई नहीं


पटना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि:

बिना नोटिस या लोनधारक की जानकारी के गाड़ी उठाना गैरकानूनी है।

यदि एजेंट ने ऐसा किया, तो एफआईआर दर्ज होगी।

संबंधित फाइनेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

यह फैसला आम नागरिक को संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) से जुड़ा अधिकार दिलाता है।



📋 वाहन जब्ती की कानूनी प्रक्रिया क्या होनी चाहिए?

1. लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।

2. किस्त चुकाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए (15–30 दिन)।

3. सिविल कोर्ट से आदेश प्राप्त किया जाए।

4. गाड़ी केवल मालिक की जानकारी और सहमति से ली जाए।



🚫 क्या नहीं कर सकती फाइनेंस कंपनी?


गुप्त रूप से वाहन उठाना

एजेंट द्वारा धमकी देना या मारपीट

मालिक की गैरहाजिरी में गाड़ी जब्त करना

नोटिस दिए बिना जब्ती की कार्रवाई करना



🛑 जबरन गाड़ी उठाने पर कौन-कौन सी धाराएं लग सकती हैं?


धाराएं विवरण

IPC 379 चोरी के तहत मामला दर्ज हो सकता है

IPC 403 अमानत में खयानत

IPC 506 आपराधिक धमकी

अनुच्छेद 21 जीवन और स्वतंत्रता का उल्लंघन



🧾 लोनधारक क्या कर सकता है?


पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएं

फाइनेंस कंपनी को कानूनी नोटिस भेजें

उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत करें

पटना हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दें



📣 निष्कर्ष: कानून का भय ही लोकतंत्र की पहचान है


पटना हाईकोर्ट का यह फैसला महज़ एक केस नहीं, बल्कि उन लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों की आवाज़ है जो अक्सर फाइनेंस कंपनियों की मनमानी का शिकार होते हैं

। यह निर्णय साबित करता है कि कानून हर किसी के लिए है — चाहे आम नागरिक हो या बड़ी कंपनी।