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पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की पहली कानूनी सीढ़ी

 

धारा 12 घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 

📢 “क्या आप जानते हैं कि घरेलू हिंसा के खिलाफ महिलाएं कोर्ट में कैसे आवेदन कर सकती हैं?”


👩‍⚖️  घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 12 की — जो पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की पहली कानूनी सीढ़ी है।"


📌 "अगर कोई महिला घरेलू हिंसा का शिकार है — जैसे मानसिक प्रताड़ना, शारीरिक हिंसा, आर्थिक शोषण या किसी भी प्रकार का उत्पीड़न — तो वो क्या कर सकती है?"


✅ "वो महिला खुद, या फिर कोई 'प्रोटेक्शन ऑफिसर' या कोई और व्यक्ति — उसकी ओर से मजिस्ट्रेट के पास 'धारा 12' के तहत आवेदन दे सकता है।"


👩‍⚖️ "ये आवेदन न्यायालय में किया जाता है — ताकि महिला को तुरंत राहत मिल सके। जैसे..."


🛡️ सुरक्षा आदेश (Protection Order)


🏠 निवास आदेश (Right to Residence)


💸 भरण-पोषण (Maintenance)


💔 मुआवजा (Compensation)



🕒 "मजिस्ट्रेट को यह आवेदन मिलते ही — सिर्फ 3 दिन के भीतर सुनवाई की तारीख तय करनी होती है।"


📆 "और कोशिश होती है कि 60 दिन में मामले का निपटारा हो जाए।"


📄 "याद रखिए — यह एक आवेदन होता है, न कि आपराधिक शिकायत। यानी CrPC की धारा 200 जैसी प्रक्रिया इसमें लागू नहीं होती!"


📢 "सुप्रीम कोर्ट ने भी 2025 में कहा — कि धारा 12 का आवेदन संज्ञान लेने योग्य 'शिकायत' नहीं है — बल्कि एक राहत दिलाने वाली प्रक्रिया है।"