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April 26, 2020

भारत का संवैधानिक विकास भाग 2


1853 चार्टर अधिनियम
1. कंपनी से 6 बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स निलंबित किए गए। (24 से घटकर 18)
2.भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S) के लिए लिखित परीक्षा की शुरुआत 1853 में लॉर्ड डलहौजी के द्वारा शुरू की गई।
3. 1853 से 1922 तक नागरिक सेवा(I.C.S) की परीक्षा लंदन में कराई गई। 1923 से भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S) की लिखित परीक्षा भारत में कराई जाने लगी।
4. भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S) को पास करने वाले पहले भारतीय बने सुरेंद्रनाथ बनर्जी.
5. प्रथम भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S) अधिकारी सत्येंद्र नाथ टैगोर थे।
1858 भारत शासन अधिनियम
1.इसी अधिनियम के द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत की समाज्ञी घोषित किया गया
2. ईस्ट इंडिया कंपनी को इस अधिनियम के तहत विघटित कर दिया गया।
3. भारत का गवर्नर जनरल अब भारत का वायसराय कहा जाने लगा।
4. लॉर्ड कैनिंग भारत का अंतिम गवर्नर जनरल और भारत का प्रथम वायसराय बनने वाला अंग्रेज था।
5.यह सभी औपचारिक घोषणा 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के मिंटो पार्क में किया गया।
6. भारत का राज्य सचिव के नाम से एक नया पद बनाया गया।
1861 भारतीय परिषद अधिनियम
1. 1860 में प्रथम भारतीय बजट जेम्स विल्सन के द्वारा पेश किया गया। इसी बजट में लॉर्ड कैनिंग के द्वारा आयकर देने की शुरुआत की गई। इसीलिए लॉर्ड कैनिंग को आयकर का जनक माना जाता है।
             जबकि विश्व का पहला बजट 1773 में रॉबर्ट वालपोल के द्वारा ब्रिटेन में पेश किया गया।
2. भारतीय दंड संहिता (I.P.C) की शुरुआत भारत मे 1861 में की गई।
3. 1861 में भारत के वायसराय (लॉर्ड कैनिंग) को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई।
4. 1862 में कोलकाता, मद्रास और बंबई उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।
5. 1862 में पोर्ट फोलियो आयोग के तहत लॉर्ड कैनिंग ने भारत का विभागीकरण किया।
6. इसीलिए विभागीकरण का जनक लॉर्ड कैनिंग को माना जाता है।
कांग्रेस की स्थापना
👉लॉर्ड डफरिन भारत का वायसराय (1884-1888 तक) जिसने एक अंग्रेज ए.ओ. ह्यूम को पढ़े-लिखे वर्गों का एक समूह बनाने को कहा।
👉ए.ओ. ह्यूम कांग्रेस की स्थापना 1885 में की मुंबई में गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में किया।
👉 कांग्रेस में शुरुआत में कुल 72 सदस्य जुड़े।
👉 व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C.Benerjee) को कांग्रेस का पहला अध्यक्ष बनाया गया
👉 1892 में दादा भाई नौरोजी ने भारतीय राष्ट्रीय शब्द कांग्रेस में जोड़ा तब से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नाम से जाना जाता है।
1892 भारतीय परिषद अधिनियम
👉 इसी अधिनियम के तहत भारत में पहली बार "निर्वाचन" शब्द का प्रयोग किया गया।
👉 इसी अधिनियम में भारतीयों को भी बजट पर बहस करने का अधिकार मिला लेकिन भारतीय बजट पर वोट नहीं कर सकते थे।
👉 इसी अधिनियम में 60 सदस्यों वाली केंद्रीय विधानसभा का गठन किया गया।
लॉर्ड कर्जन (1899-1905)
👉 लॉर्ड कर्जन के द्वारा 1905 में बंगाल का विभाजन
👉 आगा खान के द्वारा 1986 में मुस्लिम लीग की स्थापना ढाका में की गई ।
👉 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में बट गई।

April 25, 2020

भारत का संवैधानिक विकास भाग 2

1757 में प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला की हार उसके सेनापति मीर जाफर और राय दुर्लभ  के रॉबर्ट क्लाइव अंग्रेजों के साथ मिलने की वजह से हुई। मीर जाफर ने अंग्रेजों की मदद की जिसके कारण मीर जाफर को बंगाल का अगला नवाब (1757-1760) अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया। 1760 में बंगाल का अगला नवाब मीर कासिम को बनाया गया जो अंग्रेजों की फैलती हुई जड़ों को समझ गया और अंग्रेजों का विरोध करने लगा तथा मीर कासिम ने दो संदेश भेज वाय पहला भारत के मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को और दूसरा अवध के नवाब शुजाउद्दौला को , क्यों ने आपसी रंजिशों को बुलाकर अंग्रेजों को बंगाल से बाहर भगाना चाहिए मगर यह बात अंग्रेजों को पता चल गई की मीर कासिम उनके खिलाफ ही षडयंत्र कर रहा है जिसे अंग्रेजों ने मीर कासिम को 1763 में बंगाल के नवाब पद से हटाकर पुनः मीर कासिम को बंगाल का अगला नवाब बनाया गया 1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों (नेतृत्व हेक्टर मुनरो) से पुनः हारने के बाद दो संधि हुई पहला इलाहाबाद संधि (1765) जो रॉबर्ट क्लाइव और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउद्ददौला जिसमें यह तय हुआ कि अब पूरे बंगाल, बिहार और उड़ीसा प्रांत में दीवानी, राजस्व एकत्रित करने के अधिकार अंग्रेजों के पास होंगे। जिससे पुनः 1765 में रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा गया और बंगाल का नवाब राय दुर्लभ को बनाया गया । रॉबर्ट क्लाइव ने 1765 में बंगाल में द्वैध शासन लगाया। द्वैध शासन का अर्थ बंगाल में अब कर दो स्थानों पर चुकाना होगा पहला बंगाल के तत्कालीन नवाब राय दुर्लभ को तथा दूसरा कर ईस्ट इंडिया कंपनी को। द्वैध शासन 1765 -1772 तक लगाया गया जिसमें बंगाल का सारा धन ब्रिटेन भेज दिया गया 7 साल के समय को "भारत की लूट" के नाम से जाना जाता है। ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा लगाए गए द्वैध शासन से ब्रिटेन की सरकार को लगा कि कंपनी अपने व्यापारिक अधिकारों से बाहर जा रही है इसी कारण ब्रिटेन की सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी पर शिकंजा कसने के लिए 1772 में वारेन हेस्टिंग को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा गया और द्वैध शासन को समाप्त करने का आदेश दिया और विभिन्न प्रावधान बनाने की शुरुआत की इसी समय से भारत में संवैधानिक विकास का आरंभ हुआ। वारेन हेस्टिंग ने 1772 में ही जिला मजिस्ट्रेट का पद बनाया
भारत का संवैधानिक विकास दो भागों में बाटा गया है 
 1.कंपनी के अधीन शासन (company rule ) (1773-1857) 
2.क्राउन का शासन(crown rule) 1858-1947

1.कंपनी के अधीन शासन-

1773  रेगुलेटिंग अधिनियम (Regulating act)-की मुख्य बातें-

1.कंपनी द्वारा व्यापारिक अधिकारों से बाहर भारत में शासन करने पर ब्रिटिश सरकार ने कंपनी  में हस्तक्षेप करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ( B.O.D ) का गठन किया जिन्हें ब्रिटेन से नियुक्त करके भेजा जाना था 
2. कंपनी की अवधि 20 वर्षों के लिए बढ़ाया (East India company got the trade monopoly for next 20 years)
3. बंगाल का गवर्नर- बंगाल का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा Governor of Bengal became governor general of Bengal.
4. बंगाल का अंतिम गवर्नर/प्रथम बंगाल का गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग था।। The last governor of Bengal/ first governor general of Bengal was Warren Hastings.
5. 1774 में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना कोलकाता में किया गया।। In 1774 supreme court was established in Kolkata.
6. इस सर्वोच्च न्यायालय का पहला मुख्य न्यायाधीश लॉर्ड एलिजा एम्पे था।। The first chief justice of supreme court was lord Eliza lmpe.
7. सर्वोच्च न्यायालय के तीन अन्य न्यायाधीश लॉर्ड हाइड लॉर्ड चैंबर्स और लॉर्ड लिम्स्टर थे।। Three other judges of supreme court was lord Hide, lord Chambers and lord Limaster

बंगाल का गवर्नर वारेन हेस्टिंग और सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश लॉर्ड एलिजा एम्पे के मिलीभगत से वारेन हेस्टिंग अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करने लगा। जिससे नंदकुमार, चैत सिंह और घसीटी बेगम ने वारेन हेस्टिंग पर कुशासन के आरोप लगाए जिससे वारेन हेस्टिंग नाराज होकर इन तीनों को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश लॉर्ड एलिजा एम्पे के द्वारा  1784 मे फांसी की सजा सुनवाई गई।

1773 की कमियों को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1781 में एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट पारित करके भेजा

[25/04, 11:31 AM] Vashishth Competition Classes: 1785  पिट्स इंडिया अधिनियम Pitts India act.

1. 1 बोर्ड ऑफ कंट्रोलर्स की स्थापना की गई
2. इस बोर्ड ऑफ कंट्रोलर्स में 6 सदस्य थे 
3. कंपनी से व्यापार एवं प्रशासन को पृथक किया गया।
4. इस अधिनियम में कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक दूसरे से अलग किया गया और एक दूसरे के कार्यों में हस्तक्षेप ना करने का आदेश दिया गया।
[25/04, 11:38 AM] Vashishth Competition Classes: 1793 राजलेख अधिनियम (charter act)

1. ब्रिटिश कर्मचारियों का वेतन ब्रिटेन से न देकर भारत से ही देने की व्यवस्था बनाई गई।
2. 21 अप्रैल 1993 को भारतीय नागरिक सेवा (Indian civil service)  की स्थापना गवर्नर जनरल लॉर्ड कॉर्नवालिस के शासन में की गई ।
3. इसीलिए हर वर्ष 21 अप्रैल को भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S)  दिवस के रूप में मनाया जाता है।
4. भारतीय नागरिक सेवा (I.C.S) के जनक लॉर्ड कॉर्नवालिस को माना जाता है।
[25/04, 11:43 AM] Vashishth Competition Classes: 1813 राजलेख अधिनियम (charter act)

1. भारत में ईसाई मिशनरियों का आगमन ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए।
2. भारतीय शिक्षा के विकास के लिए वार्षिक ₹100000 आवंटित किया जाना प्रारंभ हुआ
3. ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकारों को समाप्त किया गया सिर्फ दो एकाधिकार अभी भी कंपनी के पास थे-
A. चाय का व्यापार
B. चीन के साथ व्यापार
[25/04, 11:47 AM] Vashishth Competition Classes: 1833 राजलेख अधिनियम (charter act)

1.इसी अधिनियम के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन का केंद्रीकरण कर दिया गया। इस प्रकार बंगाल का गवर्नर जनरल अब भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा।
2. बंगाल का अंतिम गवर्नर जनरल / भारत का प्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंन्टिक
3.इसी अधिनियम के तहत ब्रिटिशर को यह अधिकार दिया गया कि वह भारत में जमीन खरीद सकते हैं और यहां अपने उद्योग लगा सकते हैं।
4. ईस्ट इंडिया कंपनी के सारे एकाधिकार छीन लिए गए।
5. 1835 में अंग्रेजी को भारत की आधिकारिक भाषा (Official Language) बनाई गई।
April 24, 2020

भारत का संवैधानिक विकास भाग-1

भारत का संवैधानिक विकास


1757 में प्लासी का युद्ध और 1764 में बक्सर युद्ध को जीतने के बाद भारत में अंग्रेजों का प्रशासनिक हस्तक्षेप बढ़ता गया। जिसके बाद उन्होंने अपना व्यापार सूरत से अपनी पहली फैक्ट्री लगा के की थी मगर सबसे पहले अधिकार बंगाल पर किया। बंगाल के पहले गवर्नर रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच में 1757 में प्लासी का युद्ध लड़ा गया। जिसमें सिराजुद्दौला की हार हुई।
1757 में प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला की हार उसके सेनापति मीर जाफर और राय दुर्लभ  के रॉबर्ट क्लाइव अंग्रेजों के साथ मिलने की वजह से हुई। मीर जाफर ने अंग्रेजों की मदद की जिसके कारण मीर जाफर को बंगाल का अगला नवाब (1757-1760) अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया। 1760 में बंगाल का अगला नवाब मीर कासिम को बनाया गया जो अंग्रेजों की फैलती हुई जड़ों को समझ गया और अंग्रेजों का विरोध करने लगा तथा मीर कासिम ने दो संदेश भेज वाय पहला भारत के मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय को और दूसरा अवध के नवाब शुजाउद्दौला को , क्यों ने आपसी रंजिशों को बुलाकर अंग्रेजों को बंगाल से बाहर भगाना चाहिए मगर यह बात अंग्रेजों को पता चल गई की मीर कासिम उनके खिलाफ ही षडयंत्र कर रहा है जिसे अंग्रेजों ने मीर कासिम को 1763 में बंगाल के नवाब पद से हटाकर पुनः मीर कासिम को बंगाल का अगला नवाब बनाया गया 1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों (नेतृत्व हेक्टर मुनरो) से पुनः हारने के बाद दो संधि हुई पहला इलाहाबाद संधि (1765) जो रॉबर्ट क्लाइव और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउद्ददौला जिसमें यह तय हुआ कि अब पूरे बंगाल, बिहार और उड़ीसा प्रांत में दीवानी, राजस्व एकत्रित करने के अधिकार अंग्रेजों के पास होंगे। जिससे पुनः 1765 में रॉबर्ट क्लाइव को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा गया और बंगाल का नवाब राय दुर्लभ को बनाया गया । रॉबर्ट क्लाइव ने 1765 में बंगाल में द्वैध शासन लगाया। द्वैध शासन का अर्थ बंगाल में अब कर दो स्थानों पर चुकाना होगा पहला बंगाल के तत्कालीन नवाब राय दुर्लभ को तथा दूसरा कर ईस्ट इंडिया कंपनी को। द्वैध शासन 1765 -1772 तक लगाया गया जिसमें बंगाल का सारा धन ब्रिटेन भेज दिया गया 7 साल के समय को "भारत की लूट" के नाम से जाना जाता है। ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा लगाए गए द्वैध शासन से ब्रिटेन की सरकार को लगा कि कंपनी अपने व्यापारिक अधिकारों से बाहर जा रही है इसी कारण ब्रिटेन की सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी पर शिकंजा कसने के लिए 1772 में वारेन हेस्टिंग को बंगाल का गवर्नर बनाकर भेजा गया और द्वैध शासन को समाप्त करने का आदेश दिया और विभिन्न प्रावधान बनाने की शुरुआत की इसी समय से भारत में संवैधानिक विकास का आरंभ हुआ। वारेन हेस्टिंग ने 1772 में ही जिला मजिस्ट्रेट का पद बनाया