ज़मानत की शर्तें बदली जा सकती हैं, धारा 362 बाधक नहीं
Baldev Raj Arora vs. CBI/ACB Lucknow में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ज़मानत का आदेश केवल अंतरिम (Interlocutory) आदेश होता है, न कि ऐसा अंतिम आदेश जिससे मामले का निस्तारण होता हो। इसलिए CrPC की धारा 362 के अंतर्गत अंतिम निर्णय या अंतिम आदेश में संशोधन पर लगी रोक, ज़मानत की शर्तों में बदलाव पर लागू नहीं होती।
न्यायालय ने Amar Nath v. State of Haryana, V.C. Shukla v. State (CBI), Usmanbhai Dawoodbhai Memon v. State of Gujarat तथा Ramadhar Sahu v. State of Madhya Pradesh के सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा कि बदली हुई परिस्थितियों में अभियुक्त ज़मानत की शर्तों में संशोधन का अनुरोध कर सकता है और उस पर विचार करने का अधिकार न्यायालय के पास सुरक्षित है।
यह निर्णय व्यक्तिगत स्वतंत्रता, न्यायिक विवेक तथा निष्पक्ष न्याय के सिद्धांतों को और अधिक सुदृढ़ करता है।

