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अवैध कब्जे पर कानून का बड़ा हथियार

 


 यदि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से अवैध रूप से, बिना किसी विधिक प्रक्रिया के बेदखल कर दिया जाता है, तो वह पुनः कब्जा प्राप्त करने के लिए संक्षिप्त वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर सकता है ।


स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट, 1963 की धारा 6 इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु अधिनियमित की गई है, जिसके अंतर्गत यदि किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से अवैध रूप से, बिना किसी विधिक प्रक्रिया के बेदखल कर दिया जाता है, तो वह संक्षिप्त वाद प्रस्तुत कर पुनः कब्जा प्राप्त कर सकता है।


इस धारा के अंतर्गत वाद दायर करने की सीमा 6 माह निर्धारित है; विलंब होने पर वाद ग्राह्य नहीं होगा और सामान्य सिविल प्रक्रिया का अनुसरण करना पड़ेगा। साथ ही, इस प्रावधान के अंतर्गत सरकार के विरुद्ध दावा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।


विशेष रूप से, इस धारा के अंतर्गत पारित डिक्री के विरुद्ध अपील अथवा पुनरीक्षण का प्रावधान नहीं है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो और पक्षकार को शीघ्र राहत प्राप्त हो सके।


यह अधिकार स्वामी, किरायेदार अथवा पट्टेदार—सभी को उपलब्ध है, बशर्ते उनका पूर्व कब्जा सिद्ध हो।


अतः अवैध कब्जे की स्थिति में, पीड़ित पक्ष धारा 6 के अंतर्गत वाद प्रस्तुत कर त्वरित राहत प्राप्त कर सकता है, साथ ही आवश्यक होने पर आपराधिक कार्यवाही भी प्रारंभ की जा सकती है।