Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 की धारा 35 के अंतर्गत mens rea (अपराधात्मक मानसिक तत्व) के संबंध में न्यायालय एक वैधानिक अनुमान (presumption) ग्रहण करता है कि अभियुक्त को मादक पदार्थ की प्रकृति एवं उपस्थिति का ज्ञान था।
अतः एक बार कब्जा (possession) सिद्ध हो जाने पर, अभियुक्त पर यह भार स्थानांतरित (reverse burden) हो जाता है कि वह यह सिद्ध करे कि—
- उसे पदार्थ की प्रकृति का ज्ञान नहीं था, या
- उसके पास आवश्यक आपराधिक आशय (culpable mental state) नहीं था।
अभियुक्त निम्न प्रकार से अपना भार निर्वहन कर सकता है—
- अभियोजन साक्ष्य (prosecution evidence) में विद्यमान परिस्थितियों पर ही निर्भर होकर;
- अभियोजन साक्षियों से जिरह (cross-examination) के माध्यम से संदेह उत्पन्न कर;
- अपने पक्ष में स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत कर (defence evidence)।
महत्वपूर्ण सिद्धांत:
अभियुक्त को अपने बचाव में अनिवार्यतः पृथक साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है। यदि अभियोजन के ही साक्ष्य से ऐसी परिस्थितियाँ उभरती हैं जिससे न्यायालय को यह युक्तिसंगत आश्वासन (reasonable assurance) प्राप्त हो कि अभियुक्त को पदार्थ की जानकारी नहीं थी, तो धारा 35 का अनुमान खंडित (rebutted) माना जाएगा।
यदि अभियुक्त यह स्वीकार करता है कि—
- उसके ऑटो-रिक्शा में रखी बोरियों से मादक पदार्थ बरामद हुआ,
तो प्रथम दृष्टया कब्जा सिद्ध होता है।
अब यह सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर है कि—
- उसे बोरियों की सामग्री का ज्ञान नहीं था।
यदि—
- प्राधिकारी द्वारा प्रारंभिक स्तर पर महत्वपूर्ण सूचनाओं का अभिलेखन नहीं किया गया,
- पुलिस ने अन्य व्यक्तियों को वास्तविक अपराधी मानते हुए उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया,
- अभियोजन ने अभियुक्त और कथित वास्तविक अपराधियों के मध्य किसी सांठगांठ (connivance) का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया,
- दोनों के मध्य परिचय या निकटता का कोई प्रमाण नहीं है,
तो इन परिस्थितियों से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अभियुक्त ने धारा 35 के अधीन अनुमान का सफलतापूर्वक खंडन कर दिया है।
अर्थात् अभियुक्त द्वारा संदेह की युक्तिसंगत संभावना (preponderance of probability) स्थापित कर देना पर्याप्त है; उसे अभियोजन की भाँति संदेह से परे (beyond reasonable doubt) सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है।

