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आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)

 


Bhartiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) में Criminal Breach of Trust  धारा 316 में प्रावधान किया गया है। यह भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 405 एवं 406 की जगह लेती है।


धारा 316 (BNS) – आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust)

अगर कोई व्यक्ति किसी संपत्ति को इस विश्वास के साथ प्राप्त करता है कि वह उसे किसी विशेष उद्देश्य से उपयोग करेगा या किसी विशेष तरीके से लौटाएगा, लेकिन वह उस संपत्ति का दुरुपयोग करता है या उसे हड़प लेता है, तो यह अपराध "आपराधिक विश्वासघात" कहलाएगा।



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इस अपराध के मुख्य आवश्यक तत्व (Essential Ingredients)


1. संपत्ति का किसी व्यक्ति को सौंपा जाना – आरोपी को संपत्ति का कब्जा दिया गया हो।



2. विशेष उद्देश्य या विश्वास – संपत्ति किसी विशेष उद्देश्य से दी गई हो, जैसे कि किसी अन्य के लिए रखने या उपयोग करने के लिए।



3. गलत इस्तेमाल या गबन – आरोपी ने उस संपत्ति का उपयोग अनुचित रूप से किया हो या उसे हड़प लिया हो।



4. बेईमानी (Dishonesty) – आरोपी की मंशा संपत्ति को गलत तरीके से उपयोग करने या उसे वापस न करने की हो।





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सजा का प्रावधान


धारा 316(1) के तहत दंड: अधिकतम 3 वर्ष की कैद या जुर्माना या दोनों।



अगर कोई लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी, एजेंट आदि अपराध करता है


अधिकतम 10 वर्ष की कैद और


जुर्माना।


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उदाहरण:

अगर एक बैंक कर्मचारी ग्राहकों की जमा राशि का गबन कर लेता है, तो यह Criminal Breach of Trust होगा।


अगर एक व्यक्ति किसी से गहने रखवाकर उन्हें हड़प लेता है 

और वापस नहीं करता, तो यह भी इस अपराध के अंतर्गत आएगा।